मंगलवार, 15 जून 2010

भानी के ग्यारह रूप...... देखिए

ये ग्यारह रूप हैं मेरी दुलारी के। बहुत दिनों से सोच रही थी।

































































पिछले बहुत दिनों से मैंने भानी के बारे में न कुछ लिखा न कोई चर्चा की। आज भानी की पसंद की कुछ तसवीरें छाप रही हूँ। देखिए और मेरी इस प्यारी बेटी को अपना आशीष दीजिए











28 टिप्‍पणियां:

राजेश उत्‍साही ने कहा…

वाह आभा जी आपकी आभा देखकर मन बहुत खिल उठा। भानी के ये ग्‍यारह रूप देखकर मैं यह कविता कर बैठा। बहुत बहुत आशीष और प्‍यार के साथ भानी बिटिया के लिए-
भाविनी हैं कि भानी हैं,
लगती तो गुड़-धानी हैं।

चेहरे से टपके मासूमी,
लगतीं हमको नानी हैं।

कभी बनें जोकर जैसी,
कभी कभी तो रानी हैं।

पहन टोपी रास्ता रोकें,
इनकी ये मनमानी है।

बिना झप्‍पी जानें न दें,
बिटिया बड़ी सयानी है।
0 राजेश उत्सांही

abhi ने कहा…

अरे ये तो बहुत स्वीट है, बहुत क्यूट...:)
बहुत अच्छी लग रही है...सारे ग्‍यारह रूप बहुत पसंद आये :)

K S Siddharth ने कहा…

इन सभी फोटो में भानी बहुत ही प्यारी गुडिया सी लग रही है ...बहुत ही प्यारी बच्ची है आपकी..

अभय तिवारी ने कहा…

अह हा!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत प्यारे रूप...

संगीता पुरी ने कहा…

प्‍यारी भानी के सारे रूप मन को बहुत भाए .. मेरी ओर से बहुत बहुत स्‍नेहाशीष !!

मनोज कुमार ने कहा…

आस्था और आशावादिता से भरपूर स्वर इन चित्रों में मुखरित हुए हैं।

Jandunia ने कहा…

nice

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत प्यारी हो गई है भानी!! अच्छा लगा इतने रुपों में देखकर. :)

Arvind Mishra ने कहा…

स्नेहाशीष !

indli ने कहा…

नमस्ते,

आपका बलोग पढकर अच्चा लगा । आपके चिट्ठों को इंडलि में शामिल करने से अन्य कयी चिट्ठाकारों के सम्पर्क में आने की सम्भावना ज़्यादा हैं । एक बार इंडलि देखने से आपको भी यकीन हो जायेगा ।

आभा ने कहा…

राजेश जी ,भानी पर कविता रचने के लिए बहुत बहुत आभार,यह एक माँ के लिए सुखद हैं .कविता बहुत अच्छी है...

अविनाश वाचस्पति ने कहा…

भानी में झलक रही है
आपकी आभा की धूप
मुझे तो लगता है
लौटा है आपका बचपन।

आभा आई भा, बनी देखो भानी
मनभावन सुंदर कविता-कहानी की वाणी।

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

इस प्यारी भानी बिटिया को अपना स्नेह और आशीष!

Sanjeet Tripathi ने कहा…

wah wah, bhani sahiba to khoob pyari lag rahi hai sabhi roopo mein...

rashmi ravija ने कहा…

भानी ,बहुत ही प्यारी लग रही हैं...हर रूप में अद्वितीय...:)
ढेरों आशीर्वाद...आसमान की बुलंदियां छुए

निर्मला कपिला ने कहा…

वाह आभा जी एक से बढ कर एक सुन्दर रूप हैं। बिटिया को बहुत बहुत आशीर्वाद।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सुन्दर बिटिया को ढेर सारा प्यार ।

आभा ने कहा…

अविनाश जी ,आप ने बेटी के साथ साथ मुझे भी खूब कहाँ है ,आप की खास कविता-टिप्पणी से आन्नदित हूँ..

आचार्य जी ने कहा…

बहुत सुन्दर।

अनूप भार्गव ने कहा…

आशीर्वाद के रूप में दुष्यंत जी एक कविता याद आ रही है जो मुझे बहुत पसन्द है:

--
जा तेरे स्वप्न बड़े हों।
भावना की गोद से उतर कर
जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें।
चाँद तारों सी अप्राप्य ऊचाँइयों के लिये
रूठना मचलना सीखें।
हँसें
मुस्कुराऐं
गाऐं।
हर दीये की रोशनी देखकर ललचायें
उँगली जलायें।
अपने पाँव पर खड़े हों।
जा तेरे स्वप्न बड़े हों।
---

भानी के स्वप्नों के बड़े होने और उन के साकार होने की कामना के साथ ......

आभा ने कहा…

भार्गव जी
आपका आशीष पाकर भानी का जीवन उज्जवल होगा....आपकी आभारी हूँ

स्वाति ने कहा…

wah wah.. bahut sunder

Pankaj Upadhyay (पंकज उपाध्याय) ने कहा…

भानी को ढेर सारा प्यार!!

शरद कोकास ने कहा…

अरे वा ! भानी से तो अब मिलने आना ही पड़ेगा ।

Maria Mcclain ने कहा…

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यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

God Bless You Bhani!
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कल 11/11/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

सुन्दर... और प्यारी...
बधाईयाँ... शुभकामनाएं...