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मंगलवार, 20 जुलाई 2010

जैसे, जरा नच के दिखा...ऐ गोरी

मेरा मानस........

मेरा शहर, जहाँ शाम के वक्त बच्चे, अपनी अपनी बिल्डिग में खेलते हैं ।उनमे से एक हमारी बिल्ड़िंग भी है। जिसमें चार साल के बच्चों से लेकर बारहवी कक्षा तक के बच्चे
मिल जुल कर टीम बना कर खेलते हैं। इनमे एक पलक नाम की लड़की,जिसमे सुन्दरता के सारे मायने
सही साबित होते हैं ,मतलब आप कह सकते हैअच्छी है। बात यहाँ खत्म नहीं होती .
एक दिन खेल के बीच में ही मैं अपने बेटे मानस को आवाज लगा कर बोली दूध पीकर फिर खेलने जाओं। बेटा यह कह कर थोड़ा रूक गया कि मम्मा आता हूँ.मैने फिर कुछ समय बीतने पर आवाज लगाई , कि आ बेटा दूध ठंड़ा हो रहा है. फिर खाना कब खाओगे।
बेटा ठहाके लगाता हुआ ऊपर आय़ा। मै भी उसको देख स्वाभाविक रूप से खुश हुई ,और
पूछा, क्या हुआ, तो उसने बताया मम्मा खेलने के बाद यह तय हुआ ,कि सब बारी बारी से डाँन्स करेगें.।यह डाँन्स की बात पलक ने कही। जिसपर सीढ़ियों में सब अपनी- अपनी जगह तलाश कर बैठ गए। और लिफ्ट के सामने की जगह नाचने के लिए तय की गई। अब बारी नाचने की थी ,कौन कौन कौन जिस पर 7वी, 8वी 9वी में पढ़ने वाली लड़कियाँ, थोड़ा शर्माने लगी।तब बेटे ने पलक से कहा– अच्छा चल तू पहले नाच के दिखा फिर दूसरों कि बारी ...संकोच करती पलक के सामने मेरे बेटे ने शर्त रख दी । चल नाच, मै तुझे सौ रूपये दूँगा। पलक ने यह कहते हुए शर्त स्वीकार कर ली की तू तो
बड़े बाप का बेटा है ,तेरे लिए कोई बड़ी बात नहीं, और नाच दिखाया, जम कर। इधर मेरे बार-बार बुलाए जाने पर मानस बिना शर्त पूरा किए लौट आया।
पलक और उसका परिवार बहुत ही सज्जन लोग हैं। शाम के इस बिंदास माहौल में मेरे बेटे का शामिल होना भी एक अजीब तरह से खुशी दे गया । कारण मेरा बेटा कुछ ज्यादा ही सहज और संकोची है। उसका प्रमाण हमारे दोनों पक्षों के नातेदार देते रहते हैं । पिछले दिनों हमारी ही बड़ी दी की बेटी की सगाई की रस्म कलकत्ते में बड़े धूम से हुई ,जिसमें मै नहीं पहँच पाई. और वहाँ नाते दारों ने मेरे मानस की खूब खूब प्रशंसा की ,कि आज के युग में और मुम्बई में रहने वाले बच्चों मे अलग है, उसके स्कूल में मैने उसकी सुपरवाईजर से उसकी जानकारी ली ,उन्होने बताया बहुत अच्छा बच्चा है सादा और कूल माईड ,उसकी ट्यूशन टीचर की भी ऐसी ही राय है।इस शान्त और सोच समझ कर बात करने वाले बच्चे को लेकर मुझे कभी कभी उलझन होती कि यह घोर कलयुग मेरे गाँधी बाबा के लिए ठीक नहीं। बेटा जो बीच के साल दो साल पढ़ाई से मन चुराने लगा था फिर लाईन पर है । और फिलहाल की तारीख में एक परफेक्ट बच्चे की माँ की खुशी महसूस कर खुश हूँ । आगे समय खुद बताएगा, ऐसे भी मानस कर्म पर यकीन करते है। कथनी पर नहीं कम बोलना और काम करते रहना....
नोट- मानस की कुछ छवियाँ, साथ में हैं उसकी बहन भानी।